उपलब्धियां

उपलब्धियां

चूरू मेडिकल कॉलेज

चूरू की जनता द्वारा कई वर्षों से मेडिकल कॉलेज की पुरजोर मांग की जा रही थी। विभिन्न सरकारें आयी और गयी लेकिन जनता की इस मांग को पूरा नहीं किया गया। ऐसे में चूरूवासियों की इस जायज मांग व आवश्यकता को देखते हुए राजेन्द्र राठौड़ ने चूरू में मेडिकल कॉलेज खोलने की जरूरत समझी और इस दिशा में अपने कदम बढ़ाये। शुरुआत में मेडिकल कॉलेज खोलने को लेकर राजेन्द्र राठौड़ के समक्ष अनेकों चुनौतियों आई लेकिन हर चुनौती को पार करते हुए उन्होंने वर्ष 2013-18 के कालखंड़ में तत्कालीन वसुंधरा सरकार के समय चूरूवासियों का सपना साकार कर दिया। अक्टूबर 2018 में राजेन्द्र राठौड़ की मेहनत रंग लाई और चूरू को ऐतिहासिक पंडित दीनदयाल उपाध्याय मेडिकल कॉलेज की सौगात मिली। उन्होंने चूरू में आधुनिक चिकित्सा की दृष्टि से मेडिकल कॉलेज का अभूतपूर्व कदम उठाया जो वर्तमान में चूरू जिले के लिए मील का पत्थर साबित हो रहा है। वर्तमान में चूरू के सैकड़ों युवाओं को डॉक्टर की पढ़ाई के लिए अन्यत्र नहीं जाना पड़ता है। वे अब चूरू में अध्ययन कर डॉक्टर बन रहे हैं और मेडिकल कॉलेज खुलने से बड़ी तादाद में लोगों को रोजगार मिलना संभव हो रहा है।

लोहिया लॉ कॉलेज

चूरू के विकास में लोहिया कॉलेज और लॉ कॉलेज का भी योगदान रहा है. लोहिया कॉलेज में चार विषयों में स्नातकोत्तर और एक विषय में स्नातक स्तर के कोर्स की शुरुआत की गई है | 
 
 
 
 

चूरू नेचर पार्क

सितंबर, 2018 में भाजपा सरकार के समय तत्कालीन ग्रामीण विकास एवं पंचायत राज मंत्री श्री राजेन्द्र राठौड़ ने प्रदेश के दूसरे सबसे बड़े पार्क के रूप में चूरू में भव्य नेचर पार्क जनता को समर्पित किया। राजस्थान में जयपुर के सेंट्रल पार्क के बाद प्रकृति के सबसे नजदीक व दूसरा सबसे बड़ा पार्क चूरू में ही स्थित है। चूरू शहर के मध्य 90 बीघा जमीन पर 12 करोड़ 33 लाख रुपए की लागत से निर्मित नेचर पार्क चिकित्सालय की तर्ज पर बनाया गया है। जहां प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति के तहत करीब 20 प्रजातियों के 10 हजार से अधिक पौधे लगाए गए हैं और योग सेंटर, दो एक्यूप्रेशर ट्रैक, सैंड पाथ, ओपन जिम, वॉच टावर, नॉलेज पार्क, चिल्ड्रन पार्क, वुमन पार्क, हर्बल पार्क व स्वामी गोपालदास मुक्त आकाश मंच जैसी विभिन्न सुविधाओं का निर्माण आमजन के लिए किया गया है। चूरूवासियों की लंबे समय से की जा रही मांग को ध्यान में रखते हुए नेचर पार्क की परिकल्पना से लेकर इसे मूर्त रूप प्रदान करने में सबसे महत्ती भूमिका श्री राजेन्द्र राठौड़ की रही और उनका वर्षों पुराना सपना साकार हो पाया। नेचर पार्क बनने के बाद रोजाना हजारों की तादाद में हर आयु के लोग यहां भ्रमण करने के लिए आते हैं।

मेडिकल रिलीफ सोसायटी

वर्ष 1993-98 के दौरान तत्कालीन राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री भैरोंसिंह शेखावत की सरकार में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के मंत्री रहते हुए राजेन्द्र राठौड़ ने मेडिकल रिलीफ सोसायटी की स्थापना कर स्वास्थ्य क्षेत्र में नई क्रांति शुरु की। मेडिकल रिलीफ सोसायटी की स्थापना से अस्पतालों की बदहाल व्यवस्थाओं में न केवल सुधार हुआ बल्कि मरीजों को भी इसका प्रत्यक्ष लाभ मिलना संभव हो पाया। मरीजों को जो ग्लूकोज की बोतल पहले 50 रु में दी जाती थी वो इस सोसायटी के बनने के बाद मात्र 7 रुपये में उपलब्ध होने लगी। राजेन्द्र राठौड़ के इस कदम की सराहना प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हुई है और राजस्थान की तर्ज पर केन्द्र सरकार ने इसे देशभर में शुरू करने का निर्णय लिया।

चूरू अकाल

वर्ष 2002 में शेखावाटी में पर्याप्त वर्षा नहीं होने की वजह से चूरू जिला भीषण अकाल की चपेट में आ गया। पानी व चारे के अभाव में पशु दम तोड़ रहे थे, खेत बंजर हो गए थे, किसान आंसू बहा रहे थे, पशुपालकों ने चूरू से पलायन करना शुरु कर दिया था। चूरूवासी आसमान की तरफ नजरें गड़ाए रहे, मगर इंद्रदेव मेहरबान नहीं हुए। जनता को सरकार से भी मदद नहीं मिल रही थी। भीषण अकाल से जूझ रहे चूरूवासियों की पीड़ा राजेन्द्र राठौड़ से देखी नहीं गई और वे चूरू परिवार की मदद के लिए अकेले ही निकल पड़े। चूरूवासियों की मुश्किल परिस्थिति में राजेन्द्र राठौड़ ने उनके लिए अनाज व पानी तथा मवेशियों के चारे की पर्याप्त व्यवस्था की। वे करीबन 6 महीने तक लोगों को अनाज बांटकर उनके दुःख-दर्द में साथ ही खड़े रहे।