राजनैतिक-जीवन

राजनैतिक जीवन

राजेन्द्र राठौड़ बालपन से ही सदैव महान राष्ट्रभक्तों की जीवनियों से प्रेरित हुआ करते थे, इसी प्रेरणा के फलस्वरूप उन्होंने भी मातृभूमि की सेवा करने और राष्ट्रोत्थान का स्वप्न देखा। उनके राजनीतिक जीवन की शुरुआत सन् 1979 में राजस्थान विश्वविद्यालय के छात्रसंघ अध्यक्ष बनने से हुई। पढ़ने के लिए शेखावाटी से जयपुर आए राजेन्द्र राठौड़ शुरुआत से ही छात्र हितों के लिए संघर्ष करते थे और उनकी आवाज को इस कदर बुलंद करते थे कि विश्वविद्यालय प्रशासन को भी राजेन्द्र राठौड़ की मांग को आखिरकार मानना पड़ता था। छात्र राजनीति ही उनके राजनीतिक जीवन का एक प्रमुख अध्याय व आधार स्तम्भ बनीं। अल्पायु में ही राज्य व राष्ट्रीय स्तर के सामाजिक-आर्थिक व राजनैतिक मुद्दों की जागरूकता ने उन्हें लोकप्रिय छात्र नेता बना दिया। उन्होंने शुरूआत से ही अपने जीवन को छात्रों,  आम लोगों तथा राष्ट्र उत्थान के लिए समर्पित रखा। उन्होंने राज्य के कई आंदोलनों में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया जिससे उनकी छवि एक कुशल नेतृत्वकर्ता के रूप में बनीं। राजेन्द्र राठौड़ ने अपने राजनीतिक जीवन का पहला चुनाव सन् 1985 में जनता दल की टिकट पर चूरू विधानसभा से लड़ा था लेकिन उन्हें हार मिली। इस हार के बाद राठौड़ टूटे नहीं बल्कि ज्यादा ऊर्जा व जोश के साथ चूरू को अपना परिवार मानकर जनसेवा के मार्ग पर निकल पड़े। वर्ष 1990 में राजेन्द्र राठौड़ ने पुनः चूरू विधानसभा से ही चुनाव लड़ा और इस बार भारी मतों से जीतकर राजस्थान विधानसभा में पहुंचे। यहीं से उनकी अनवरत जीत का सफर कभी नहीं थमा और वे लगातार 7 बार विधायक बनकर जनता की सेवा कर रहे हैं। वर्ष 1990 से लेकर अब तक राजेन्द्र राठौड़ ने लगातार जीत हासिल कर जो रिकॉर्ड कायम किया है वो अद्वितीय है। राजस्थान विधानसभा में सदस्य बनने के बाद भारतीय जनता पार्टी की सरकार के दौरान हर बार राजेन्द्र राठौड़ की कुशलता व नेतृत्व क्षमता को देखते हुए उन्हें विभिन्न मंत्रालयों का जिम्मा सौंपा गया।