नारी शक्ति

नारी शक्ति हर दिन एक नया इतिहास रच रहीं हैं.. वो भी एक दौर था, ये भी एक दौर है… अब तस्वीर बदल रही है। वो अपने हाथों से खुद की तकदीर लिख रही है।इन्होंने परम्पराएं बदली, सोच बदली और जीने का अंदाज भी बदला लिया है। उस वक्त से लेकर आज तक बहुत कुछ बदलते हुए मैंने स्वयं भी देखा है। देश हर कदम आगे बढ़ रहा है। मन में बहुत खुशी होती है, जब देश और प्रदेश की बेटियां और महिलाएं शिक्षित, समृद्ध और आत्मनिर्भर होकर देश का मान बढ़ाने में अपना अमूल्य योगदान देती है। इनकी कहानियां और कार्य दोनों ही हम सबके अंदर शक्ति, साहस,सौहार्द और आत्मविश्वास को बढ़ाने का कार्य करती हैं। बात फिर चाहे बात आत्मनिर्भरता की एक बेहरीन मिसाल बनी और सर्वोच्च नारी सशक्तिकरण पुरस्कार से सम्मानित रूमादेवी जी ने अपने कार्यों से राजस्थान ही नहीं देश का मान भी विदेशों में बढ़ाया। इन्होंने स्वसहायता समूह की शक्ति के जरिए आत्मनिर्भर बनने की एक और कहानी की शुरूआत कर दी। वहीं राजस्थान की बेटियों के गौरव और सामर्थ को बढ़ाने का कार्य पायलट पारुल शेखावत जी ने बोइंग 777 को उड़ाकर बखूबी किया। यह उस सोच को सही साबित करने के लिए उठाया गया एक सही कदम था, जिसमें महिलाएं भी पुरूषों की तुलना में बेहतर ढंग से किसी भी कार्य को कर पाने में सक्षम हैं। समय आगे बढ़ रहा था और नारी शक्ति ने अपने शौर्य का परिचय स्वयं दे रही थी। राजस्थान की बेटी ने अपूर्वी चंदेला जी 10 मीटर एयर राइफल रैंकिंग में वर्ल्ड नंबर एक खिलाड़ी बनकर अपने तीरों से हर उस निशाने को भेद दिया, जो उसके सपनों को पूरा करने में बाधा बन रहा था। वहीं एक बार फिर शक्ति अपने साहस के बल पर सफलता पथ की ओर अग्रसर हो चली थी, जब राजस्थान राजसमंद के गांव काबरा में रहने वाली और भारतीय एथलीट भावना जाट ने राष्ट्रीय चैंपियनशिप की 20 किमी पैदल चाल स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीत नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया और इस साल टोक्यो में होने वाले ओलंपिक के लिए क्वालीफाई भी कर लिया। नारी शक्ति के सामर्थ, साहस और सशक्तिकरण होने का सफर अभी भी जारी है। यह आगे भी जारी रहेगा। इन जैसी प्रतिभा राजस्थान की हर उस नारी में है, जो अपने नारी शक्ति के वास्तविक अस्तित्व से दुनियां को परिचित कराना चाहती हैं। क्योंकि प्रकृति का नियम है। प्रगति के लिए निरंतरता अनिवार्य है। शक्ति की यही निरंतरता भविष्य में नित नए—नए कीर्तिमानों को स्थापित करने के लिए जरूरी है, ताकि इतिहास के पन्नों पर नारी शक्ति द्वारा सशक्तिकरण की एक नई इबारत लिखी जा सके।

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