कोरोना - 2020

मैं चला था सफर पर उम्मीदों को अपनी झोली में भरकर। कोरोना विपदा में लोगों के कष्टों को हरने के लिए आज मैं बहुत दूर निकल आया हूं। इस यात्रा में कुछ को खोया है और कुछ को पाया है हमनें।

जब भी याद करता हूं तो तकलीफ बढ़ जाती है। मैंने और आपने कोरोना रूपी वैश्विक महामारी के वक्त को बहुत नजदीक से देखा है और आज भी हम सब इसे देखे रहे हैं जिसकी पुनरावृत्ति की कल्पना पुन: कर पाना असंभव है।

मैंने कोरोना काल में अपने सफर की शुरूआत पहली लहर के दौरान सबसे पहले अपनी विधानसभा चूरू में पहुंचकर सोशल डिस्टेंसिंग के साथ बैठक आयोजित कर की। इस बैठक में कोरोना से लड़ाई के लिए रणनीति तय की और यहीं से उम्मीदों का यह सफर अस्पतालों में हो रहे कुप्रबंधन को जगह-जगह औचक निरीक्षण कर हुआ।

उस दौरान कोरोना कुप्रबंधन का दर्द लोगों के चेहरे पर साफ झलक रहा था। जिसे भुलाया नहीं जा सकता है। यह महामारी लोगों को तकलीफ देने के साथ एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आई। इस महामारी के कारण लोगों के रोजगार खत्म हो गए। कई के व्यापार ठप हो गया और हजारों परिवार ब्याजखोरों के कर्जदार हो गए। इस काल में जीवन यापन करना एक बड़ी चुनौती बन गया। जिससे लड़ना जरूरी था। लेकिन खाली पेट जंग कहां जीती जाती है।

बस तब जाकर मन में ख्याल आया "कोई भी भूखा ना सोए" और मैं निकल पड़ा अपनों को साथ लेकर चूरू में उन बेसहारा परिवार को भोजन उपलब्ध कराने के लिए। तब से यह सफर निरंतर जारी है और इसके जरिए हजारों परिवारों तक राशन और खाद्य सामग्री पहुंचाई जाती रही। यह इस अभियान की खूबसूरती थी कि कोरोना काल की इस घड़ी में बेजुबान पशु और पक्षियों को भी इसी संकल्प के साथ दाना-पानी, चारा और कई क्विंटलों ट्रक फल,तरबूज,घीया,पत्तागोभी व अन्य सब्जियां गौशाला सहित विभिन्न पशुओं के लिए लॉकडाउन में भेजी जाती रही। लम्बे समय तक चले लॉकडाउन ने हर किसी को परेशान कर दिया। आजीविका की चिंता सामने आने लगी। इस घड़ी में भी हमने हिम्मत नहीं हारी और देश के सबसे लोकप्रिय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी और भाजपा संगठन प्रमुख जेपी नड्डा जी के कुशल मार्गदर्शन में मददगार बनते हुए कई "सेवा कार्य'' अभियान चलाएं। यह सेवार्थ कार्य अभी भी जारी है। इनके जरिए हजारों कोरोना की मार झेलने वाले परिवारों को संबल प्रदान किया गया।

मेरे दृढ़ता संकल्प को भामाशाहों ने अपने सहयोग से संबल प्रदान करते हुए "एक परिंड़ा, एक पालक अभियान" और "अन्नपूर्णा अक्षय पात्र" के जरिए लॉकडाउन में पंक्षियों के लिए जगह-जगह परिंडा लगाकर उनकी भूख को मिटने के लिए निरंतर कार्य किया, जिसके सुखद परिणाम आज भी देखे जा सकते हैं।कोरोना की पहली लहर में 24 मार्च को 21 दिनों के लिए पूरे देश को लॉकडाउन कर दिया गया। तब इस महामारी के प्रकोप के चलते लाखों अप्रवासियों ने अपने घरों पर पहुंचने के लिए मीलों-मील तक का सफर तय किया। तब इन अप्रवासियों के सफर को सुलभ बनाने के लिए "चरण पादुका अभियान" से हजारों अप्रवासी राहगीरों को पादुका पहनाई गई। जिसकी खुशी उनके चेहरे पर साफ दिखती थी। यह कोशिश थी उनके पैर में पड़ने वाले उन छालों के दर्द को कम करने की,जो कोरोना की दशहत के चलते उन लोगों को मिले।

समय बीतता गया और धीरे-धीरे यह सफर अपनी रफ्तार पकड़ता गया और कोरोना योद्धाओं के सम्मान से लेकर बहुउदेद्शीय "पीएम केयर फंड" के लिए एक करोड़ से अधिक सहायता राशि को एकत्रित करने के लिए मेरे साथ चूरूवासी कदम से कदम मिलाकर चले। इस बात की मुझे बेहद खुशी है। इसी दौरान कोरोना की चपेट में आने से मैं अपनों से कुछ वक्त के लिए दूर रहा और कोरोना से जंग जीतने के बाद मैं पुन: अपनी मंजिल की ओर बढ़ने लगा। मेरे स्वास्थ्य के लिए चूरूवासियों ने प्रार्थनाएं और पूजा भी कराई। यह मेरे प्रति चूरूवासियों का प्यार है, जो अनमोल है।

कोरोना की दस्तक मेरी कर्मभूमि चूरू में पैर ना पसारे इसके लिए स्वयं मैंने और मेरे सहयोगियों ने पैदल घर-घर जाकर सैनिटाइजेशन कर लोगों को सतर्क करने के लिए जागरूकता अभियान चलाएं और पीपीई किट्स, सेनेटाइजर बॉटल, मास्क व काढ़े का वितरण भी कराया। ताकि कोरोना की चपेट में चूरूवासी न आएं।

वर्ष 2021 कोरोना की दूसरी लहर :

कितना भी डराओ हमको हम हिम्मत नहीं हारेंगे। डटकर करेंगे मुकाबला और कोरोना को हराकर मानेंगे। बस यही विचार के जरिए मेरे मन और इच्छाशक्ति को निरंतर दृढ़ता प्राप्त हुई। वैश्विक महामारी कोरोना की दूसरी लहर का सामना करने के लिए हम फिर तैयार हो गए। हालांकि कोरोना की दूसरी लहर उसकी पहली लहर से भी ज्यादा घातक साबित हो रही है। इसने ना जाने कितने परिवारों को उजाड़ दिया। अपनों के असमय काल कवलित होने से हजारों मासूम अनाथ और बेघर हो गए। प्राणवायु की किल्लत से कई जिंदगियां तबाह हो गई और अपनों का साथ छोड़ गई। तब रिकॉर्ड समय में चूरू में "ऑक्सीजन प्लांट" स्थापित कर लोगों की जिंदगी को बचाने की पहल की।